प्रकाशन नैतिकता नीति
‘कृषि शोध दर्पण’ उच्च गुणवत्ता, मौलिकता, पारदर्शिता एवं जिम्मेदार शोध प्रकाशन के लिए निम्नलिखित प्रकाशन नैतिकता सिद्धांतों का पालन करता है:
- मौलिकता एवं अप्रकाशित सामग्री: लेखक मौलिक एवं अप्रकाशित सामग्री प्रस्तुत करें तथा एक ही लेख को एक साथ एक से अधिक पत्रिकाओं में न भेजें।
- शोध की सत्यनिष्ठा: प्रस्तुत तथ्य, आँकड़े एवं निष्कर्ष सत्य, विश्वसनीय एवं प्रमाणिक होने चाहिए। आँकड़ों की हेराफेरी, मनगढ़ंत आँकड़े एवं भ्रामक प्रस्तुति स्वीकार्य नहीं होगी।
- लेखकीय योगदान: सभी सह-लेखकों का वास्तविक योगदान एवं उनकी सहमति सुनिश्चित की जानी चाहिए। लेखक सामग्री की मौलिकता एवं शुद्धता के लिए उत्तरदायी होंगे।
- संपादकीय निष्पक्षता: संपादकीय निर्णय लेख की गुणवत्ता, विषय-संगतता एवं वैज्ञानिक महत्त्व के आधार पर निष्पक्ष और पारदर्शी रूप से लिए जाएँगे।
- हितों का टकराव: लेखक, संपादक एवं समीक्षक किसी भी संभावित व्यक्तिगत, व्यावसायिक, वित्तीय अथवा संस्थागत हितों के टकराव का खुलासा करेंगे।
- नैतिक उल्लंघन पर कार्रवाई: साहित्यिक चोरी, गलत या मनगढ़ंत आँकड़े, गंभीर तथ्यात्मक त्रुटि अथवा अन्य नैतिक उल्लंघन पाए जाने पर लेख हटाने, सुधार सूचना जारी करने अथवा लेख वापस लेने जैसी कार्रवाई की जा सकती है।
- शिकायत एवं विवाद निवारण: प्रकाशन संबंधी शिकायतों एवं लेखकीय विवादों पर उपलब्ध तथ्यों और पत्रिका की नीति के अनुसार निष्पक्ष विचार किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित संस्थान अथवा सक्षम प्राधिकारी से मार्गदर्शन लिया जा सकता है।
- नैतिक प्रतिबद्धता: पत्रिका सभी लेखकों, समीक्षकों एवं संपादकीय सदस्यों से ईमानदारी, निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं अकादमिक उत्तरदायित्व बनाए रखने की अपेक्षा करती है।
